MARTYRED

Writing in your own language doesn’t sometimes mean your command over it. Here I write it to display myself for my own people…. The MARTYRES and The ARMYMEN.

ख़ुशक़िस्मती तेरी, जो जान पर वो लड़ पड़े।

बस सलामती तेरी, पाने को ना वो डरे।

भूल कर वो जान को , सीमा रेखा पर खड़े।

समुद्र लहरों से लड़े, पहाड़ हो तो वो चढ़ें।

एक ही जहान है, वो सबसे महान है।

सीना तान कर भी वो , निडर अडिग बढ़े चले।

ना दुश्मनों की मार से , ना साथ लाए हार से।

जोश था वो सरचढ़ा, दिन बदिन वो बढ़ चला।

ना डर के साये से घिरा, ना ख़ून देख के हिला।

अडिग अचल वो बढ़ चला, अखंड दीप बन चला।

आँख बंद कर के भी, बस उन्हें वही दिखा।

वतन ये महान है, ये मूल दृश्य है चढ़ा।

माँ को भूल जाना हो, बेटे से दूर जाना हो।

क़दम बढ़ा के बढ़ चला, ना मूड कर वो घर चला।

माँ उसकी भी ज़रूर है, बेटा देख दुःख में चूर है।

हाँ वो उनसे दूर है।

चढ़ा जो एक जुनून है, ये देख ही फ़ितूर है।

वो देश का ग़ुरूर है।

वो देश का ग़ुरूर है।

~D Frozen Wanderer

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